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सेब का उत्पादन बन रहा आय का साधन

Stone temples at Jageshwar, Almora
Photo creditUttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.

Deepti.Pandey · 2021-02-14

चकलुवा में नर्सरी में तैयार सेब की पौध, उत्तराखंड राज्य के साथ साथ कई राज्यों के सेब उत्पादक काश्तकारों की आय का अच्छा श्रोत बन रहीं हैं। इसे काफी उन्नत नस्ल की सेब माना जाता है। यहां विकसित सेब की पौध उत्तराखंड के अलावा कई अन्य राज्यों के किसान ले जाते हैं। उत्तरकाशी के नौगांव विकासखंड के कंडारी गांव के 10 काश्तकारों ने अपने बगीचे में चकलुवा की नर्सरी के सेब के पौधे उगाए। आज यह काश्तकार प्रतिमाह औसतन 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी कर रहे हैं। उन्नत खेती के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त प्रगतिशील किसान सुधीर चड्ढा ने बताया कि वर्ष 2002 में भारत में अधिकांश क्षेत्रों में सेब चीन से आता था, उन्होंने तभी विचार आया की कि वे उन्नत किस्म के सेब की प्रजाति का अपने देश में ही उत्पादन करेंगे। 15 वर्ष की मेहनत के बाद उन्हें इस कार्य में सफलता मिली। आज उनकी नर्सरी में तैयार सेब के पौधों से उत्तराखंड सहित विभिन्न प्रदेशों के किसानों को अच्छी पैदावार मिल रही है। शनिवार को चमोली के जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत और सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीताराम गौड़ ग्रामीणों के साथ चकलुवा पहुंचे। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी जिले में अब तक बड़कोट, पुरोला, नौगांव, कंडारी व मालानी में कई परिवारों ने सेब के बगीचे तैयार किए हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 150 किसानों ने 10 नाली भूमि में सेब के बगीचे तैयार किए हैं। सेब उत्पादन से पलायन रोकने में मदद मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादक किसानों को सब्सिडी देने की मांग को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
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