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बिच्छू घास सिर्फ हथियार या हैं और भी काम? ?

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.rashi.arera · 2020-09-02
बिच्छू घास सिर्फ एक हथियार, या फिर आता है काम, किसी और भी प्रकार?
"बिच्छू से डरना धर्म बन गया! जब से शैतानी कर्म बन गया!"
1) मेरे विचार - बिच्छू क्यों है हथियार? उत्तराखंड भले ही प्रगति शील है, परंतु आज भी जड़े उसकी उतनी ही गहरी है। भले ही आज हमारे उत्तराखंड ने "इजा" से "माँ" और "माँ" से "मम्मी" तक का सफर कर लिया हो परंतु इस देवभूमि में अभी भी वही संस्कार व्याप्त है। वही बड़ों का आदर करना। वही बच्चों का शैतानी करना। और वही घर में माँ को अपनी शैतानी से परेशान करना, यहीं से शुरू होता है "बिच्छू घास" का प्रयोग में आना। आज इस प्लेटफार्म के माध्यम से, मैं सभी बड़े और छोटे लोगों से जुड़ना चाहती हूँ, जिन्होंने अपने बचपन में हम सभी के "अत्यधिक प्रिय" (कृपया यहां मेरा व्यंग्य समझे) बिच्छू घास का सामना अवश्य किया है। 2) चलिए जान लेते हैं कि, मेरे उसका सामना करने के ज्यादातर क्या कारण रहते थे:-- पहला और सबसे आम कारण -पहाड़ी इलाके में और हरी भरी जगह में घर होने के कारण, छोटे बिच्छू घास के पौधों का मेरे पैरों की त्वचा से कई बार मिलना हो जाता था। (आप लोग सही समझे हैं। मैं अपनी शैतानियों के बारे में बात करने से बचने की कोशिश कर रही हूँ। )
- मेरा और मेरे भाई का पढ़ाई के दौरान पढ़ाई को छोड़, बाँकी सब करना।
- घर पर पापा मम्मी की गंभीर बातों के दौरान, कोलाहल करना।
- टीवी ना देखने के सख्त निर्देशों का पालन ना करना।
- खेल कर ठीक 1 घंटे में वापस घर ना आना।
- मुझे दिन में सोना बिल्कुल पसंद नहीं है, इसलिए मम्मी कहती थी - "मेरे वापस आने तक सोए ना मिले.... तो बिच्छू मिलेगा!"
- बिच्छू घास "कुमाऊनी" में "सिसूण", "गढ़वाली" में "कंदाली", "अंग्रेजी" में "स्टिंगिंग नेटल" तथा "वैज्ञानिकी भाषा" में "अर्टिका डियेका" के नाम से मशहूर है।
- बिच्छू घास, डंक मारने वाले पौंधे के रूप में जाना जाता है क्योंकि इस को स्पर्श करने पर त्वचा में झनझनी(जलन) फैल जाती है।
- बिच्छू घास को छूने पर जलन होने के साथ-साथ त्वचा में लालिमा व सूजन आने लगती है| गीली की गई बिच्छू घास का असर दोगुना होता है।
- बिच्छू घास की उम्र आम तौर पर 2 साल होती है।
- बिच्छू घास स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभप्रद है, इसमें अनयान्य प्रकार के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं| इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, सोडियम, कैल्शियम और आयरन आदि का भंडार है।
- बिच्छू घास की सबसे अधिक पैदावार अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में की जाती है।
इसीलिए कहा गया है के, "अपूर्ण जान होने से बेहतर ज्ञान ना होना है। "
6) बिच्छू घास एवं अन्य लाभदायक कार्य जहाँ बिच्छू घास का एक सशक्त हथियार के रूप में प्रयोग होता है, वहीं बिच्छू घास कई अन्य प्रकार से काम में आता है। चलिए जान लें बिच्छू घास के ऐसे प्रयोग, जिससे नहीं हैं डरते बच्चे, हर रोज :-- यह लिखते हुए मैं इसकी पुष्टि स्वयं करना चाहूँगी, इसका स्वाद लेने का मौका मुझे स्वयं प्राप्त हुआ था, जी हाँ! बिच्छू घास की सब्जी बनाई जाती है,और यह सौभाग्य मुझे मेरी नानी के हाथों द्वारा प्राप्त हुआ।
"मैं उस दिन को और बिच्छू के उस निर्मल स्वभाव को कभी नहीं,पाऊँंगी भुला
और
कस स्वाद छिन व्येक शब्दाें में कि बतों भुला!"
- अल्मोड़ा के करीब चितई के पंत गाँव में स्थापित कंपनी पिछले डेढ़ साल से, बिच्छू घास से बनी 500 किलो चाय का देशभर में निर्यात कर चुकी है। इस चाय का सालाना उत्पादन 4 कुंटल है। इसका स्वाद बिल्कुल खीर के समान होता है| काफी मांग होने के कारण इस बिच्छू घास से बनी चाय के 50 ग्राम के एक पैकेट की कीमत ₹110 है।
- बिच्छू घास को औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, जैसे:-
- उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को कम करना।
- किसी भी प्रकार के दर्द (जैसे माँसपेशियों का दर्द, पीठ दर्द, मासिक धर्म के दौरान होने वाला दर्द) को कम करना।
- मोच आने पर आराम।
- त्वचा संबंधी समस्याओं का निदान।
- गठिया में इसका तेल लाभदायक होता है।
- बालों और मुहांसों के लिए फलकारी होता है।
- बिच्छू घास का प्रयोग कर ऊन बनाया जाता है, उसका इस्तेमाल शाल, कंबल, जैकेट आदि का निर्माण होता है।
- उत्तराखंड में जब पहाड़ी महिलाओं ने मदिरा के विमत हो मोर्चा उठाया था, तो शराबियों को सबक सिखाने हेतु महिलाओं ने बिच्छू घास का ही इस्तेमाल किया।
"बिच्छू घास का साया था आया था, बचपन पर डर मंडराया था! शांति व सन्नाटा छाया था, वो बच्चा पहाड़ी कहाँ, जो बिच्छू से ना थर्राया था!" - darkness_entails_light
UttaraPedia