कुमाऊँ और गढ़वाल उत्तराखंड के दो प्रशासनिक मंडल हैं। कुमाऊँ में छह और गढ़वाल में सात ज़िले आते हैं। इन नामों का संबंध स्थानीय पहचान, बोली, भोजन और परंपराओं से भी है। नक्शा समझते समय यह बुनियादी फर्क जानना काम आता है।
पहली यात्रा में वही क्षेत्र चुनें जहाँ पहुँचना सुविधाजनक हो और आपकी रुचि की जगहें एक उचित रास्ते में आती हों। नैनीताल–अल्मोड़ा की यात्रा और देहरादून–मसूरी की यात्रा अलग योजनाएँ हैं। दोनों क्षेत्रों की प्रसिद्ध जगहों को एक छोटी छुट्टी में जोड़ देने से घूमने का समय गाड़ी में बीत सकता है।
किस मंडल में कौन से ज़िले हैं
| कुमाऊँ | गढ़वाल |
|---|---|
| अल्मोड़ा | चमोली |
| बागेश्वर | देहरादून |
| चम्पावत | हरिद्वार |
| नैनीताल | पौड़ी गढ़वाल |
| पिथौरागढ़ | रुद्रप्रयाग |
| ऊधम सिंह नगर | टिहरी गढ़वाल |
| — | उत्तरकाशी |
कुमाऊँ मंडल का मुख्यालय नैनीताल और गढ़वाल मंडल का मुख्यालय पौड़ी है। ज़िले और उसके मुख्य शहर को एक ही जगह न मानें। नैनीताल ज़िले में बताया गया होटल नैनी झील से काफी दूर किसी दूसरे कस्बे में हो सकता है। बुकिंग से पहले गाँव या कस्बे का पूरा नाम देखें।
प्रमुख जगहों को नक्शे में पहचानें
| क्षेत्र | कुछ प्रमुख जगहें | योजना कहाँ से शुरू करें |
|---|---|---|
| कुमाऊँ | नैनीताल और आसपास की झीलें; अल्मोड़ा–जागेश्वर; कौसानी; पिथौरागढ़–मुनस्यारी | कई पहाड़ी मार्गों के लिए काठगोदाम या हल्द्वानी से आगे की सड़क यात्रा |
| गढ़वाल | देहरादून–मसूरी; हरिद्वार–ऋषिकेश; टिहरी; चारधाम के मार्ग | वास्तविक गंतव्य के अनुसार देहरादून, हरिद्वार या ऋषिकेश |
हर पंक्ति की जगहें एक छोटे सर्किट की सूची नहीं हैं। मुनस्यारी के लिए नैनीताल के आसपास की झीलों से अलग समय चाहिए। इसी तरह मसूरी में ठहरना और ऊँचे हिमालय की तीर्थयात्रा करना अलग तैयारी माँगते हैं। केवल मंडल के नाम से किसी जगह की ऊँचाई, मौसम या पहुँच तय नहीं होती।
तीन से पाँच दिन हों तो कैसे चुनें
- काठगोदाम पहुँच रहे हैं: पहले झीलों के आसपास ठहरने और अल्मोड़ा को आधार बनाने की तुलना करें। एक मुख्य इलाका रखें; समय हो तो पास के दो ठहराव चुनें।
- देहरादून पहुँच रहे हैं: देहरादून–मसूरी की योजना से शुरुआत कर सकते हैं। दूसरी दिशा की जगह जोड़ने से पहले वापसी का समय देखें।
- हरिद्वार या ऋषिकेश पहुँच रहे हैं: तय करें कि नदी किनारे के नगरों में समय बिताना है या आगे पहाड़ जाना है। दोनों की दिनचर्या अलग होगी।
ये सुझाए गए विकल्प हैं, तय पैकेज नहीं। आने और लौटने के दिन अलग गिनें। पाँच दिन की छुट्टी में देर से पहुँचने और जल्दी लौटने पर पहाड़ में केवल तीन पूरे दिन मिल सकते हैं। विस्तृत शुरुआत के लिए काठगोदाम से पाँच दिन का कुमाऊँ कार्यक्रम देखें।
कुछ नाम जिनसे भ्रम होता है
- Kumaon और Kumaun अंग्रेज़ी में एक ही क्षेत्र की अलग वर्तनियाँ मिल सकती हैं।
- पौड़ी गढ़वाल एक ज़िला है; गढ़वाल मंडल उससे बड़ा है।
- उत्तराखंड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। पूरे भारत का चारधाम समूह इससे अलग है।
- भीमताल, सातताल और नौकुचियाताल अलग जगहें हैं; इन्हें नैनी झील के आसपास के मोहल्ले न समझें।
स्थानीय जीवन के लिए भी समय रखें
बाज़ार में घूमने, स्थानीय भोजन समझने और मेज़बान से बात करने के लिए खाली समय रखें। किसी पकवान या जगह के नाम का स्थानीय अर्थ पूछें। लोगों और पूजा-अनुष्ठान की तस्वीर लेने से पहले अनुमति लें। एक ज़िले का परिचय वहाँ के हर समुदाय की पूरी पहचान नहीं बताता।
क्षेत्रीय भाषा सीख रहे हों तो स्थानीय बोलने वाले से शब्द और उच्चारण की मदद लें। UttaraPedia का भाषा संसार हिंदी के माध्यम से कई भाषाएँ सिखाता है। इसे कुमाऊँनी या गढ़वाली का पूरा पाठ्यक्रम न मानें।
क्या एक यात्रा में दोनों मंडल घूम सकते हैं
लंबी यात्रा में संभव है, यदि दोनों को जोड़ने वाला सड़क सफर भी आपकी योजना का हिस्सा हो। ठहराव बुक करने से पहले हर रात की जगह और वापसी का स्टेशन या हवाई अड्डा नक्शे पर देखें। मौसम और सड़क की स्थिति के लिए अतिरिक्त समय रखें। किसी खास सुबह हिमालय दिखने की गारंटी पर यात्रा न टिकाएँ।
तारीख़ चुनने के लिए मौसम के अनुसार यात्रा गाइड पढ़ें। उसके बाद अपनी चुनी जगहों के ज़िला परिचय खोलें। वर्तमान ट्रेन, सड़क की स्थिति और होटल की व्यवस्था यात्रा के पास दोबारा जाँचना जरूरी है।
UttaraPedia


