पुराने संग्रह से
आओ नूतन वर्ष मनाएं (कविता)

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.NirmalJoshi · 2020-12-30
आओ नूतन वर्ष मनाएं
दस्तक देने लगा द्वार पर
फिर से नूतन वर्ष
कुछ करें नया ऐसा
कि सबका हो उत्कर्ष
आओ नई उमंगें जगाएं
आशाओं के बंदनवारों को
मन देहरी के द्वार सजाएं
दिल के केनवास पर
नये उछाह के रंगों से
फिर से एक रंगोली बनाएं
सज उठें नई तस्वीरें फिर से
बोलें सब खुशियों की बोली
हम सब फिर फिर उठें
कोरोना से लड़ने को
संग संग जुटे
बीते कोरोना बरस का अब
कोई घाव हरा न रह जाए
भूल कर सारी दुश्वारियां
विश्वास नया जगमगाए
उम्मीदों का एक नया सूरज
फिर से अपने आँगन में उतारें
फैला दें उसकी किरणें
उस उस घर तक हम
जहां तलक फन फैलाये
खड़ा था वो तक्षक कोरोना
फैलाएं यह संदेश उन तक
कहें उनसे डरो ना, डरो ना
आओ उस उस घर तक हम
आशा का अमृत पहुंचाए
इस नए वर्ष में
कुछ नया कर जाएं
आओ नूतन वर्ष मनाएं।
आओ नूतन वर्ष मनाएं।
- निर्मला जोशी' निर्मल'
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