पुराने संग्रह से
रूपकुंड (कंकाल झील) थ्रिलिंग लेक

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.mukesh.kabadwal · 2020-10-18
रूपकुंड (कंकाल झील) उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक हिम झील है जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक मानव कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।यह झील चारों तरफ से बर्फ और ग्लेशियर से घिरी हुई है। इस झील की गहराई लगभग 2 मीटर है। यह झील टूरिस्टों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है।
यहां रोमांचक यात्रा के शौक़ीन लोगों का तांता लगा रहता है। टूरिस्ट यहाँ ट्रैकिंग करते हुए पहुँचते हैं और इस जगह पर मौजूद नरकंकालों को देख अचंभित हो जाते हैं। रूपकुंड झील में मौजूद नरकंकालों की खोज सबसे पहले 1942 में हुई थी इसकी खोज एक नंदा देवी रिज़र्व के रेंजर एच.के माधवल द्वारा की गई थी इस जगह के बारे में नेशनल जियोग्राफी को पता चला तो, उन्होंने भी यहाँ अपनी एक टीम भेजी. उनकी टीम ने इस जगह पर 30 और कंकालों की खोज की थी। साल 1942 से हुई इसकी खोज के साथ आज तक सैकड़ों नरकंकाल मिल चुके हैं। यहाँ हर लिंग और उम्र के कंकाल पाए गए हैं। इसके अलावा यहाँ कुछ गहने, लेदर की चप्पलें, चूड़ियाँ, नाख़ून, बाल, मांस आदि अवशेष भी मिले है। जिन्हें संरक्षित करके रखा गया है। इस झील में मौजूद कई कंकालों के सिर पर फ्रैक्चर भी है। जिसके पीछे भी कई किवदंतियां हैं।
जापानी सैनिकों के कंकाल -
इस झील से कई सारी कहानियाँ और किवदंतियां जुड़ी हुई हैं. जिसमें से एक थ्योरी ये मानी गई कि यहाँ पर मौजूद यह खोपड़ियाँ कश्मीर के जनरल जोरावर सिंह और उनके आदमियों की है. यह बात 1841 की मानी जाती है जब वह तिब्बत युद्ध के बाद वापिस लौट कर आ रहे थे।
माना जाता था कि वह बीच में ही हिमालय क्षेत्र में अपना रास्ता भटक गए. इस पर और भी ज्यादा तब बुरा हुआ, जब मौसम भी ख़राब हो गया जिसके बाद वो लोग वहीं फंस गए और उनकी भारी ओलों की वजह से मौत हो गई वहां दूर-दूर तक भी कहीं छिपने की जगह नहीं थी. हिमालय में आये भीषण तूफ़ान की वक़्त से वे लोग अपनी जान नही बचा पाए. वहीं एक कहानी ये भी थी कि ये नरकंकाल जापानी सेनिको के हैं। जो भारत में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे। कहा जाता था कि इसके बाद इस पर रिसर्च की गई जिससे पता चला कि यह हड्डियाँ जापानी लोगों की नहीं हैं बल्कि यह सैकड़ों साल पुरानी हैं।
इन कंकालों के पीछे जहाँ सैनिकों और युद्ध से जुड़ी हुई कहानी है। तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का विश्वास कुछ और ही रहा है. वहां के लोकल लोग इससे जुड़ी हुई एक किवदंती को मानते हैं।
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