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उत्तराखंड की डिप्टी कलेक्टर जुड़वाँ बहनें

Stone temples at Jageshwar, Almora
Photo creditUttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.

secureutt · 2020-10-30

2014 में उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग बैच की महिलाओं में दो शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाली - जुड़वाँ बहने युक्ता मिश्र एवं मुक्ता मिश्र अपने अथक परिश्रम एवं कार्यकुशलता से राज्य भर लोकप्रिय, प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी राज्य भर में पहचान बना चुकी हैं।

पिछले छह वर्षों में उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों में उप जिलाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए वर्तमान में क्रमशः नरेन्द्रनगर और सितारगंज में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य कर रही हैं। दोनों बहने अपने प्रशासनिक दायित्वों से आगे बढ़ दोनों समय – समय पर, विभिन्न सामाजिक गतिविधियों, सामाजिक उत्थान हेतु अपना योगदान देती रहतीं हैं।

दोनों बहिने युक्ता मिश्र और मुक्ता मिश्र ने बरेली कॉलेज से स्नातक में प्रवेश लिया ही था कि पोस्टल असिस्टेंट के रूप में उनका चयन हो गया, और अपनी पढाई छोड़कर दोनों ने अल्मोड़ा डाकघर में कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही – अल्मोड़ा सोबन सिंह जीना कैंपस से स्नातक में प्राइवेट स्टूडेंटस के रूप में प्रवेश लिया।

डाकघर में कार्य करते हुए बेहद व्यस्त रहने के बावजूद दोनों ने अनुशासित हो, कार्य और अध्ययन के बीच संतुलन बना न सिर्फ –  लोक सेवा आयोग परीक्षा की तैयारी की, साथ ही व्यक्तिगत (Private) विद्यार्थियों के रूप में स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा कुमाऊं यूनिवर्सिटी के सोबन सिंह जीना अल्मोड़ा कैंपस से उतीर्ण की, वह भी अपने विषयों में संस्थागत (Regular) परीक्षा में शीर्ष स्थान पाने वाले विधार्यियों से अधिक अंक लेकर।

राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में, अपने प्रथम प्रयास में ही महिलाओं में शीर्ष दो स्थान प्राप्त कर – राज्य सरकार के अधिकारी बनने से पूर्व दोनों क्रमशः परिवहन कर अधिकारी और पोस्टल इंस्पेक्टर के रूप में कार्य कर रही थी।

एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं, को सार्थक करती उत्तराखंड मूल की बहनों की आरंभिक शिक्षा गोपेश्वर, सहारनपुर और बरेली से हुई। मिश्र बहने बाल्यकाल से ही समय का समुचित उपयोग करती, पढाई और खेल दोनों में सदैव विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करती रहीं हैं।

सफलता आसानी से नहीं मिलती है, राह में अवरोध भी आते हैं। दोनों बहनों का जीवन के प्रति ध्येय रहा है – कि उन्हें अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु चलना है, चलते रहना है, चाहे कितनी ही बाधाये आयें।

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प्रतियोगिता दर्पण में कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित भेटवार्ता (देखें नीचे) के माध्यम से, उनके बारे में कुछ और जान सकते हैं।

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