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आदि कैलाश और ॐ पर्वत: पहाड़, आस्था और एक याद रह जाने वाला सफ़र

धारचूला के आगे बदलते पहाड़, जोलिंगकोंग का खुला विस्तार और बर्फ में उभरता ॐ—जानिए इस यात्रा में क्या खास है।

UttaraPedia · प्रकाशित: 2023-04-13 · अपडेट: 2026-10-06

आदि कैलाश और ॐ पर्वत: पहाड़, आस्था और एक याद रह जाने वाला सफ़र

पहाड़ की कुछ यात्राएँ मंज़िल पर पहुँचने से पहले ही मन में जगह बना लेती हैं। धारचूला के आगे आदि कैलाश की ओर बढ़ते हुए भी रास्ता धीरे-धीरे बदलता है। नदी के साथ चलती सड़क, ढलानों पर बसे गाँव और फिर ऊँचे पहाड़ों का खुला विस्तार—हर पड़ाव इस यात्रा में कुछ जोड़ता है।

किसी के लिए यहाँ आने की वजह शिव के दर्शन हैं, किसी के लिए हिमालय को पास से देखना। आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा में दोनों भाव साथ चल सकते हैं। बस इतना ध्यान रहे कि दोनों नाम एक ही पहाड़ के नहीं हैं।

आदि कैलाश: जोलिंगकोंग की ओर खुलता दृश्य

आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पवित्र पर्वत है। इसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है। शिव–पार्वती से जुड़ी आस्था और तिब्बत के कैलाश से मिलती आकृति इसकी पहचान का हिस्सा हैं, लेकिन दोनों अलग स्थान हैं।

कुटी से जोलिंगकोंग की दिशा में पहुँचकर ऊँचे हिमालय का परिवेश सामने आता है। यहाँ पार्वती सरोवर, मंदिर और आसपास के पर्वत यात्रा के मुख्य आकर्षण हैं। हवा शांत हो और दृश्य साफ़ हो तो झील का पानी पहाड़ की छवि भी समेट लेता है।

गौरीकुंड भी इसी क्षेत्र के धार्मिक संदर्भों में आता है। हर स्थान तक पहुँच को एक जैसा आसान न मानें; पैदल दूरी, रास्ते और उस समय की अनुमति के बारे में स्थानीय मार्गदर्शक से पूछें।

ॐ पर्वत: बर्फ और चट्टान में उभरता आकार

ॐ पर्वत देखने के लिए गुंजी से कालापानी होते हुए नाभीढांग की दिशा में जाते हैं। पहाड़ की गहरी चट्टानों और उन पर जमी बर्फ के मेल से ॐ जैसा आकार उभरता है। यही दृश्य लोगों को यहाँ खींच लाता है।

तस्वीरों में दिखने वाला आकार हर समय उतना स्पष्ट नहीं होता। बर्फ की मात्रा, बादल, मौसम और रोशनी दृश्य बदल देते हैं। साफ़ दर्शन को निश्चित मानकर आने के बजाय हिमालय के इसी बदलते स्वभाव के लिए भी तैयार रहें।

गुंजी के बाद दोनों रास्ते अलग समझें

यात्रा का सामान्य प्रवेश धारचूला की ओर से होता है। आगे गुंजी क्षेत्र तक पहुँचने के बाद आदि कैलाश के लिए कुटी–जोलिंगकोंग और ॐ पर्वत के लिए कालापानी–नाभीढांग की दिशाएँ अलग हो जाती हैं।

इस छोटे से फर्क को समझ लेने पर पूरा मार्ग साफ़ हो जाता है। दोनों दर्शनों को एक ही पड़ाव की दो तस्वीरें मानने के बजाय अलग यात्राओं की तरह समय दें।

रास्ते के गाँव भी यात्रा का हिस्सा हैं

व्यास घाटी को केवल ऊँचे पर्वतों तक पहुँचने का रास्ता मानकर निकल जाना आसान है। लेकिन गुंजी, नाबी और कुटी जैसे गाँव इस क्षेत्र को उसकी अपनी पहचान देते हैं। स्थानीय घरों, लोगों की दिनचर्या और बातचीत में पहाड़ का वह पक्ष मिलता है जो viewpoint की तस्वीर में नहीं दिखता।

जहाँ ठहरने का अवसर मिले, मेज़बानों से उनकी जगह के बारे में पूछें। लोगों या घरों की तस्वीर लेने से पहले अनुमति लें। स्थानीय भोजन और होमस्टे का अनुभव यात्रा को समृद्ध कर सकता है, बशर्ते आप वहाँ की सीमित सुविधाओं और लोगों की निजता का सम्मान करें।

धीरे देखें, तभी कुछ याद रहेगा

दर्शन के बाद तुरंत लौटने की जल्दी न हो तो कुछ देर बस सामने देखिए। बादलों से खुलती चोटी, ढलान पर बदलती रोशनी और पानी पर चलती हवा—यहाँ दृश्य छोटी-छोटी बातों से बदलता है।

फोटोग्राफी के लिए केवल लंबा लेंस जरूरी नहीं। एक चौड़ा दृश्य रास्ते और पहाड़ का संबंध दिखाता है, जबकि करीब का फ्रेम किसी चोटी या बनावट को उभार सकता है। कैमरा निकालने के लिए सुरक्षित जगह रुकें; वाहन रोककर सड़क संकरी न करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों के निर्देश मानें।

PopcornTrip के साथ देखिए यह सफ़र

रास्ते, पहाड़ और यात्रा का माहौल इस वीडियो में देखें। यह यात्रा के समय का दृश्य रिकॉर्ड है; निकलने से पहले सड़क और अनुमति की ताज़ा स्थिति अलग से जाँचें। YouTube ↗

मन बन गया हो तो तैयारी यहाँ से करें

यह ऊँचाई और बदलते मौसम वाला सीमांत क्षेत्र है। सड़क पहुँचने का अर्थ यह नहीं कि बिना तैयारी निकल पड़ें। कागज़ात, स्वास्थ्य, ठहराव और वर्तमान सड़क स्थिति समझकर ही यात्रा तय करें।

अगला कदम है हमारी आदि कैलाश यात्रा की तैयारी वाली गाइड पढ़ना। उसमें मार्ग, बुकिंग से पहले के सवाल और जरूरी सामान की बात है। पहाड़ों में थोड़ा अतिरिक्त समय अक्सर यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा बन जाता है।