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उत्तरकाशी में देश का पहला हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.sunaina · 2020-08-12
देश का पहला हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र उत्तराखंड के जिला उत्तरकाशी में जल्द ही बनने जा रहा है। यह हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र नीदरलैंड की मदद से स्थापित किया जाएगा, जिससे विंटर टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और हिम तेंदुओं का संरक्षण भी किया जा सकेगा।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्तमान में देश में लगभग 586 हिम तेंदुए हैं, जिनमें से लगभग 86 तेंदुए प्रदेश में होने का अनुमान है। दुर्लभ होने के कारण इसे घोस्ट ऑफ माउंटेन भी कहा जाता है।
उत्तराखंड में हिम तेंदुआ लगभग 3000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर जैव विविधता वाले क्षेत्रों गंगोत्री नेशनल पार्क, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में अधिक पाए जाते हैं।
केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार का हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र स्थापित करने का उद्देश्य है कि, आने वाले दशक में हिंदुओं की संख्या को दुगना किया जा सके।
भारत सरकार द्वारा हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र के स्थापना करने की घोषणा अंतरराष्ट्रीय हिंम तेंदुआ दिवस ( 23 अक्टूबर ) के अवसर पर पहला राष्ट्रीय प्रोटोकॉल ( first national protocol on snow leopard population assessment ) लॉन्च करने पर की गई।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ( National Tiger Conservation Authority ) भी सर्वेक्षण के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसी दौरान वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण ( Global Snow Leopard and Ecosystem Protection ) कार्यक्रम के चौथे संचालन समिति की बैठक का उद्घाटन दिल्ली स्थित पर्यावरण एवंं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किया गया। वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण ( Global Snow Leopard and Ecosystem Protection ) हिम तेंदुए की रेंज वाले 12 देशों का एक उच्च स्तरीय अंतर-सरकारी गठबंधन है। वर्तमान में इसके संचालन समिति के बैठक की अध्यक्षता नेपाल ने तथा सह-अध्यक्षता किर्गिस्तान द्वारा की गई। इस सर्वेक्षण में भारत के साथ नेपाल मंगोलिया, रूस और सभी हिम तेंदुओं की मौजूदगी वाले देश शामिल है।
हिम तेंदुआ - यह उच्च हिमालयी और ट्रांस हिमालयी क्षेत्र के राज्यों जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है। हिम तेंदुए को भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में शामिल किया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ( international Union for Conservation of Nation - IUCN ) में यह सुभेद्य श्रेणी ( vulnerable category ) में है। यह हिमांचल प्रदेश का राजकीय पशु भी है।
भारत सरकार ने तेंदुओं के संरक्षण के लिए अन्य परियोजनाएं भी शुरू की है- 1. सिक्योर हिमालय, 2. प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड
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