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आपदा में है कई अवसर रोजगार के, उत्तराखण्ड वासियों के लिए

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Uttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.Himanshu.Pathak · 2020-09-01
कोरोना काल क्या आया ? अपने साथ कुछ संशय लाया, कुछ संभावनायें भी लाया। लाँकडाऊन हुआ, लोगों को अपना घर याद आया।
ये लोग वही थे, जो पहले कहते थें उत्तराखण्ड में क्या है?
जब मैं कहता था यारो यहीं रहो, अपना घर अपना ही होता है। अपनी जगह अपनी ही होती है। वैसे भी कहते हैं घर की आधी भली।
तो ये लोग कहते थे, तुम ही रहो यहाँ, वैसे भी कुछ नही है यहाँ पर। हम तो चले परदेश ,वहाँ सुनहरा भविष्य है, रोजगार के नये-नये अवसर हैं, बच्चों के लिये अच्छी शिक्षा है, व अच्छी चिकित्सा व्यवस्था है।
मैंने भी हँसकर उनको विदा किया और वो विदा होकर जाते हुए मुझे ऐसे देख रहे थे मानों मैं बहुत बड़ा मूर्ख हूँ।
अब ये लोग लौट कर आने लगे घर वापस, मानो "लौट के बुद्धु घर को आऐ।" तो मैंने भी लगे हाथों पूछ लिया "यारों कैसे याद आ गई घर की, अपनों की, कब तक हो?" वो लोग भी शर्मिन्दा थे। बोले "यार क्या करते वहाँ"? "लाँकडाऊन ने तो जैसे सब कुछ छीन लिया"। तो आज मैं उन्हें बिल्कुल भी छोड़ने के मूड में नही था। मैंने फिर पूछा "क्यों वहाँ तो सुनहरा भविष्य था?" फिर क्या हुआ कि तुम लोग इतना भी जमा नही कर पाये कि इक्कीस दिन भी शहर में नही टिक पाए। "उनकी आँखों में शर्मिंदगी थी।
मैंने उन लोगों को एक जगह पर एकत्रित किया, मुझे खुशी थी कि मेरी बात मान कर वो मेरे बुलाने पर आए। फिर मैंने उनसे बात करनी शुरू की। "देखो यारों मैं पहले भी तुम्हें यही रहने को कहता था। तब तुम लोग कहते थे यार शहर में रोजगार है, भविष्य है, शिक्षा है व चिकित्सा सुविधा है। मित्रों मैं भी ये मानता हूँ कि उत्तराखंड में हम लोगों को मिलकर बहुत कुछ करना हैं।उत्तराखण्ड में, विकास का सूरज उगे, इसके लिऐ हम लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा। इसके लिऐ हम लोगों को निम्न बिंदुओं पर काम करना होगा- उत्तराखंड की नैसर्गिक सुन्दरता को बनाये रखने के लिऐ ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाऐं। जिससे उत्तराखंड में ज्यादा से ज्यादा पर्यटन का विकास हो और स्थानीय लोगों के लिऐ अपने ही घर में रोजगार के अवसरों का सृजन हो सके।
- लोग उत्तराखंड में पाँच सितारा होटल में रहने नही आते एसी में बैठकर चाय काँफी पीने नही आते हैं। ये सुविधा तो उन लोगों को शहरों या महानगरों में भी मिल जाती है।लोग यहाँ आते हैं मन की शान्ति के लिऐ,आध्यात्मिक शान्ति के लिये,प्राकृतिक सौन्दर्य का आन्नद लेने के लिये।उन्हें वो सब कुछ यहाँ उपलब्ध कराया जा सकता है। नऐ-स्थानों की खोज कर उन्हें पर्यटन स्थल के रूप मेः विकसित किया जाय ।पर्यटकों के लिऐ स्थानीय लोगों के सहयोग से उनके घरों का उपयोग पर्यटक घरों के रूप में किया जाये ,उन घरों में आवश्यक सुविधायें हों स्थानीय भोजन पर्यटकों को उपलब्ध कराया जाय, व उन्हें आसपास की जगह घुमाने की व्यवस्था हो तो हर घर में रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो सकेगा।
- यारों यहाँ पर अति लघु व लघु उद्योगों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाय, जैसे मुगोड़ी व बड़ी उद्योग, मडूवे का उत्पादन में वृद्धि कर मडूवे के आटे से बिस्कुट, नमकीन आदि बनाने के लिय उद्योग, मिनरल वाटर प्लांट, फ्रूट जूस प्लांट आदि। इससे हर घर में रोजगार के नये अवसर उत्पन्न होंगें।
- उत्तराखंड में फल -फूलों के ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगें व औषधि से सम्बन्धित प्लांटेशन पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाय।
- उत्तराखंडमें कुछ प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार में हैं जैसे हिशालू, किलमोड़ि आदि इन्हें फिर से विकसित कर इन्हें पर्यटकों से परिचित कराया जाना चाहिये इसके दो फायदे होंगे एक तो पर्यटकों को नये फलों का स्वाद लेने का आनंद मिलेगा और दूसरा खेतो की फसलों को जंगली जानवरों से सुरक्षा मिल पायेगी।और लोगों की आय बढ़ेगी सो अलग। इसके अलावा इनकी जड़ों का उपयोग औषधि के रूप मे भी होता है।
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