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पहली बार बन रहा उत्तरा फाल्गुनी में अनोखा योग

Stone temples at Jageshwar, Almora
Photo creditUttarakhand collection · context photograph · PradeepBisht · CC BY-SA 4.0 · Resized, WebP conversion and display crop. Same license as original.

nitin_kumar · 2020-09-17

१७ सितम्बर को सर्व पितृ अमावस्या का शरद समापन हो जायेगा जिसके बाद १८ सितम्बर को अधिक मॉस शुरू हो जायेगा!आपको बता दें की अधिक मॉस बहुत ख़ास होता है क्युकी ये ३ साल में एक बार आता है लेकिन इस बार का मॉस तो और भी बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि १९ साल के बाद अश्विन अधिक मॉस है यानी इस साल दो अश्विन मॉस होंगे इससे पहले २००१ के में ऐसा सह्यौ बना था इस अधिक मॉस से कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जो वैभव वृद्धि करने वाले हैं वैसे तो अधिक मॉस भगवन विष्णु और श्री कृष्ण की आराधना का है लेकिन अश्विन मॉस होने के कारण ये माता लक्ष्मी की कृपा पाने का भी तरीका है, इस तरह से ये महीना माता लक्ष्मी और भगवन विष्णु दोनों की आराधना का है। अधिक मॉस १८/०९/२०२० शुक्रवार से शुरू हो रहा है! ज्योतिषों के मुताबिक उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र तीव्र फल देने वाला होता है, इस नक्षत्र में महीने की शुरुवात शुभ और शिग्रह फल देने वाली रहेगी, उत्तरा फाल्गुनी में सम्मान, समृद्धि भी तेजी से बढ़ती है, अधिक मॉस में वैभव कार्य तेजी से परिणाम देने वाले होंगे, उस समय शुक्ल नाम का शुभ योग भी रहेगा। ये योग अपने नाम की तरह प्रकाश और शीतलता देता है, इस महीने सोना, चाँदी और मशीन खरीदने के कई शुभ योग बन रहे हैं, बता दें की अधिक मॉस के दूसरे दिन १९ सितम्बर को द्विपुष्कर योग है, २० को स्वतिनक्षत्र, २१ को विशाखा नक्षत्र रहेगा, २६ सितम्बर को सर्वार्थसिद्धि योग और २७ सितम्बर को कमला एकादशी है! इसे माता लक्ष्मी का दिन कहा जाता है, भगवन विष्णु को भी प्रिये है अधिक मॉस को ग्रंथों ने ब्याज का समय कहा है, ये साल के १२ महीनो से अतिरिक्त मिला समय है, इसे पुरषोतम मॉस भी कहते हैं, विष्णु को सृष्टि का संचालक मन गया है, वे घरस्थ जीवन के देवता हैं! वे घरस्थों को ही सारा वैभव देते हैं, शास्त्रों के मुताबिक अश्विन मॉस के पूर्णिमा लक्ष्मी के आगमन की तिथि मानी गयी है! इसे हम शरद पूर्णिमा कहते हैं, इसके कारण अश्विन मॉस को लक्ष्मी की आराधना का दिन भी मन गया है, ग्रन्थ कहते हैं की अश्विन मॉस में किया गया जप, तप, दान और व्रत ये अक्षय फल देते हैं।
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