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उत्तराखंड: परिचय
neha · 2022-11-07
उत्तराखंड जिसे देवों की भूमि-देवभूमि उत्तराखंड के नाम से जाना जाता हैं, हिमालय की तलहटी में स्थित हैं। राज्य के उत्तर में चीन और पूर्व में नेपाल के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ हैं। इसके उत्तर-पश्चिम में हिमांचल प्रदेश, जबकि दक्षिण में उत्तर प्रदेश है।
उत्तराखंड कई मायनों में एक बेहतरीन जगह हैं, यहाँ हर जगह कुछ दूरी पर आपकों कोई पवित्र स्थल और मंदिर देखने को मिल जाएगा। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र, पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। यहाँ की हरी-भरी घाटियाँ, पवित्र नदियाँ, दिव्य तीर्थस्थल, असंख्य वनस्पतियों और जीवों का आवास, मनुष्य को ईश्वर का एक दिव्य उपहार है। वर्षों से उत्तराखंड अनगिनत प्रकृति प्रेमियों, आध्यात्मिक यात्रा पर निकले तीर्थयात्रियों को प्रेरणा एवं आनंद की अनुभूति कराता रहा है, शहरी भाग-दौड़ से परे - उत्तराखंड का शांत वातावरण स्वर्ग की सी अनुभित देता है।
उत्तराखंड का इतिहास
वैसे तो उत्तराखंड का इतिहास अभी का नहीं अपितु कई समय पहले का है, जिसका जिक्र कई हिंदू पुराणों में मिलता है। पुराणों में केदारखंड (वर्तमान गढ़वाल) और मानसखंड (वर्तमान कुमाऊं) का जिक्र किया गया हैं। पुराणों में, उत्तराखंड मध्य भारतीय हिमालय के लिए प्राचीन शब्द था। इसकी चोटियों और घाटियों को स्वर्ग लोक के रूप में जाना जाता था। इसके इतिहास को सबसे अच्छे तरीके से गढ़वाल और कुमाउं के इतिहास के माध्यम से समझा जा सकता है।उत्तराखंड में कई राजाओं ने राज किया उसके बाद यहाँ गोरखा, अंग्रेज आए। देश की आजादी के बाद उत्तराखंड ने उत्तरप्रदेश से अलग राज्य उत्तरांचल की लड़ाई लड़ी जिसमें कई लोगों शहीद भी हुए। आखिरकार 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल देश के 27 वे राज्य के रूप में बना। 2007 में उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।उत्तराखंड का भूगोल:
उत्तराखंड राज्य का कुल भूभाग 53,483 वर्ग किलोमीटर का है। उत्तराखंड का ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ों और जंगलों से घिरा है। उत्तराखंड की विशिष्ट वनस्पतियों और जीव जंतुओं में बाघ, तेंदुए और असामान्य झाडि़यां और पेड़ शामिल हैं। भारत की दो बड़ी नदियां यमुना और गंगा के उद्गम स्थान राज्य में ही हैं। उत्तराखंड की कई भौगोलिक विशेषताएं हैं जिनमें प्रमुख भौगोलिक विशेषताएं इस प्रकार हैं:- पहाड़ी झाड़ीदार भूमि और मैदान
- अल्पाइन की झाडि़यां और चराई
- सामान्य शंकुधारी जंगल
- पश्चिमी हिमालय के उप अल्पाइन शंकुवृक्ष जंगल
- पश्चिमी हिमालय के सामान्य पतझड़ी जंगल
- हिमालय श्रृंखला के सबट्राॅपिकल देवदार जंगल
- तराई-दुआर की तराई और सवाना
- अपर गंगा के मैदानों के नम पतझड़ी जंगल
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